Wednesday, September 21, 2011
Thursday, September 15, 2011
Wednesday, September 14, 2011
Monday, September 12, 2011
Monday, August 22, 2011
आज़ाद
देखता हूँ जब मैं लोगों के हंसते हुए चेहरे
याद आते हैं मुझे उनके रोते हुए चेहरे,
दिल से निकल के वो कहीं आँखों में छुपा है
सीने में समंदर है मगर उठती नही लहरें,
साहिल पे बैठे बैठे रात भी टपक रही है
उतर गया है वो शक्स शायद पानी कहीं गहरे,
आज़ाद हो गये हैं वो जो ता-उम्र क़ैद थे
उठ गये हैं ज़ींदो पे लगे हुए पहरे.
याद आते हैं मुझे उनके रोते हुए चेहरे,
दिल से निकल के वो कहीं आँखों में छुपा है
सीने में समंदर है मगर उठती नही लहरें,
साहिल पे बैठे बैठे रात भी टपक रही है
उतर गया है वो शक्स शायद पानी कहीं गहरे,
आज़ाद हो गये हैं वो जो ता-उम्र क़ैद थे
उठ गये हैं ज़ींदो पे लगे हुए पहरे.
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